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क्या भारत में अब प्लास्टिक के नोट आएंगे? जानिए वायरल दावे का सच और पॉलिमर करेंसी की सच्चाई

June 11, 2026 22 Views

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से फैल रही है कि भारत में अब कागजी नोटों की जगह 'प्लास्टिक' (पॉलिमर) के नोट लेने वाले हैं। दावे के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत में कागजी नोट बंद हो जाएंगे और उनकी जगह नए प्लास्टिक नोट चलन में आ जाएंगे। आइए जानते हैं कि इस खबर में कितनी सच्चाई है और आखिर ये पॉलिमर नोट होते क्या हैं।

वायरल दावे का सच: RBI और PIB ने क्या कहा?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे ने आम लोगों के बीच काफी उलझन पैदा कर दी थी, जिसके बाद सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

  • पूरी तरह फर्जी है दावा: केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाले प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इस दावे को पूरी तरह से गलत और भ्रामक करार दिया है।

  • RBI की कोई योजना नहीं: प्रेस रिलीज के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक की वर्तमान में कागजी नोटों को वापस लेने या उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी लाने की कोई योजना नहीं है।

  • आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा: सरकार और पीआईबी ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी अनवेरिफाइड दावे पर भरोसा न करें। नोटों से संबंधित किसी भी आधिकारिक घोषणा के लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आधिकारिक वेबसाइट ही एकमात्र विश्वसनीय स्रोत है।

क्या हैं 'प्लास्टिक' या पॉलिमर नोट?

हालांकि भारत में इनके आने की फिलहाल कोई योजना नहीं है, लेकिन दुनिया के कई देशों में ये सफलतापूर्वक चल रहे हैं। ये नोट साधारण प्लास्टिक के नहीं, बल्कि एक विशेष तकनीक से बने होते हैं।

  • कैसे बनते हैं ये नोट? ये नोट 'पॉलीप्रोपलीन' (Polypropylene) नामक एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने होते हैं।

  • बेहद टिकाऊ: पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में 4 से 5 गुना अधिक समय तक चलते हैं। ये पानी, नमी और गंदगी से आसानी से खराब नहीं होते। यहाँ तक कि अगर गलती से ये नोट वाशिंग मशीन में धुल भी जाएं, तो भी इन्हें नुकसान नहीं पहुंचता।

  • सुरक्षा फीचर्स: पॉलिमर नोटों में सुरक्षा के उन्नत फीचर्स होते हैं, जिससे नकली नोट छापना बहुत कठिन हो जाता है।

वैश्विक स्तर पर इनका इतिहास

प्लास्टिक नोटों की शुरुआत करने का श्रेय ऑस्ट्रेलिया को जाता है। 1988 में दुनिया का पहला पॉलिमर नोट जारी करके ऑस्ट्रेलिया ने करेंसी की सुरक्षा और मजबूती के लिए एक नया ग्लोबल स्टैंडर्ड सेट किया था। आज कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे कई विकसित देश इसी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

भारत में पहले भी हुआ है विचार

यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारत में पॉलिमर नोटों पर चर्चा नई नहीं है। इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को सूचित किया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा। हाल के बयानों में भी इस तकनीक पर विचार करने की बात उठी है, लेकिन फिलहाल यह केवल 'विचार' या 'प्रस्ताव' के स्तर पर है, इसे लागू करने का कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

जागरूक नागरिक बनें

सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाना एक बड़ी चुनौती है। यदि आपको भी सोशल मीडिया पर भारत सरकार से जुड़ा कोई भी संदिग्ध कंटेंट दिखता है, तो आप उसकी शिकायत @PIBFactCheck पर कर सकते हैं। याद रखें, किसी भी सरकारी नीति या बदलाव पर भरोसा करने से पहले हमेशा उसकी पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट से जरूर करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सूचनाओं और आधिकारिक फैक्ट-चेक के आधार पर लिखा गया है। भारत में प्लास्टिक नोट आने की खबरें फिलहाल अफवाह हैं।

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