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8th pay commission attendance rules

June 18, 2026 18 Views

8th Pay Commission Attendance Rules: क्या देर से आने पर अब नहीं कटेगी Half-Day CL? जानें नए नियम, प्रस्ताव और कर्मचारियों की अन्य बड़ी मांगें

8th Pay Commission Attendance Rules: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए कामकाजी माहौल और नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। यदि आप भी एक केंद्रीय कर्मचारी हैं और सुबह दफ्तर पहुंचते समय भारी ट्रैफिक, मेट्रो की देरी या बायोमेट्रिक सिस्टम की कड़ाई से परेशान रहते हैं, तो 8th Pay Commission (आठवां वेतन आयोग) आपके लिए बड़ी राहत की खबर ला सकता है।

कर्मचारी यूनियनों और संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के सामने उपस्थिति और छुट्टियों के नियमों (attendance and leave rules) को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाने की जोरदार वकालत की है। इस समय सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है, जिसके तहत दफ्तर देर से पहुंचने पर कर्मचारियों के खाते से सीधे आधे दिन की आकस्मिक छुट्टी (Half-Day Casual Leave) काट ली जाती है।

आइए इस विस्तृत लेख में समझते हैं कि वर्तमान अटेंडेंस नियम क्या है, कर्मचारी संगठनों (जैसे NC-JCM और AINPSEF) ने इसमें क्या बदलाव सुझाए हैं, और इसके साथ ही सैलरी, फिटमेंट फैक्टर व पेंशन को लेकर कौन सी अन्य बड़ी मांगें आयोग के सामने रखी गई हैं।


वर्तमान Attendance Rule क्या है और कर्मचारियों को क्या परेशानी है?

वर्तमान में लागू नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों में समयबद्धता (Punctuality) को लेकर काफी कड़े प्रावधान हैं:

  • महीने में केवल 2 दिन की छूट: मौजूदा व्यवस्था के तहत कोई भी कर्मचारी महीने में केवल दो बार अधिकतम 1 घंटे की देरी से (यानी ग्रेस पीरियड के साथ) कार्यालय पहुंच सकता है। इन दो मौकों पर उस पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती।
  • तीसरी बार लेट होने पर सीधा नुकसान: यदि कोई कर्मचारी महीने में तीसरी बार लेट होता है, या फिर वह तय समय से ज्यादा लेट हो जाता है, तो उसके लीव बैलेंस (Leave Balance) से सीधे आधे दिन की आकस्मिक छुट्टी (Half-Day CL) काट ली जाती है। यदि कर्मचारी के पास सीएल उपलब्ध न हो, तो उसकी अर्न लीव (EL) से कटौती की जाती है।

कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्या:

कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि आज के समय में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगरों और लगभग सभी छोटे-बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इसके अलावा, अब सभी केंद्रीय प्रतिष्ठानों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम (Biometric Attendance System) अनिवार्य रूप से लागू है, जो एक-एक मिनट की देरी को भी दर्ज करता है। ऐसे में कई बार न चाहते हुए भी कर्मचारियों की गाड़ियां या पब्लिक ट्रांसपोर्ट लेट हो जाते हैं, और इस कड़े नियम के कारण उन्हें अपनी छुट्टियां गंवानी पड़ती हैं।

8th Pay Commission: NC-JCM ने क्या नए प्रस्ताव दिए हैं?

National Council-Joint Consultative Machinery (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) को भेजे गए अपने आधिकारिक ज्ञापन (Memorandum) में एक बहुत ही तार्किक और लचीला समाधान प्रस्तावित किया है।

1. दिनों के बजाय '120 मिनट' का ग्रेस पीरियड (Grace Period)

यूनियनों ने मांग की है कि लेट आने के 'दिनों की संख्या' गिनने के बजाय एक मंथली टाइम-पूल (Monthly Time Pool) की व्यवस्था की जानी चाहिए।

  • प्रस्तावित नियम: एक कर्मचारी को पूरे महीने में कुल मिलाकर 120 मिनट (2 घंटे) की कुल ग्रेस पीरियड दी जाए।
  • यह कैसे काम करेगा?: मान लीजिए कोई कर्मचारी किसी दिन 15 मिनट लेट हुआ, किसी दिन 20 मिनट लेट हुआ, तो इसे तब तक माफ किया जाए जब तक कि पूरे महीने का कुल जोड़ 120 मिनट तक न पहुंच जाए।
  • छुट्टी कब कटेगी?: केवल उसी स्थिति में Half-Day CL काटी जाए, जब कर्मचारी की कुल संचित देरी (Cumulative Late Attendance) महीने में 120 मिनट की इस समय सीमा को पार कर जाएगी।
"देश के लगभग सभी शहरों में यातायात की भारी समस्या और सभी केंद्रीय सरकारी प्रतिष्ठानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू होने के तथ्य को देखते हुए, उपरोक्त प्रावधान में संशोधन किया जाना चाहिए। महीने में 120 मिनट तक की देरी को माफ (Condoned) किया जाना चाहिए और इस ग्रेस पीरियड के बाद ही हाफ-डे सीएल की कटौती की जानी चाहिए।"
- NC-JCM स्टाफ साइड मेमोरेंडम

2. घायल कर्मचारियों के लिए बेहतर लाभ (WRIIL में सुधार)

अटेंडेंस के साथ-साथ NC-JCM ने ऑन-ड्यूटी घायल होने वाले कर्मचारियों के अधिकारों के लिए भी आवाज उठाई है। उन्होंने Work-Related Illness and Injury Leave (WRIIL) के नियमों में संशोधन की मांग की है:

  • पूरी सैलरी का प्रावधान: यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना या बीमारी का शिकार होता है, तो उसे पूरी लीव सैलरी (Full Leave Salary) मिलनी चाहिए। 'वर्कमेन कंपनसेशन एक्ट' के तहत मिलने वाले किसी भी मुआवजे के कारण उसकी सैलरी से कोई कटौती नहीं होनी चाहिए।
  • लीव क्रेडिट जारी रहे: कर्मचारी जब तक चोट या बीमारी के कारण WRIIL (इंजरी लीव) पर रहता है, तब भी उसकी अर्न लीव (EL) और अन्य लीव क्रेडिट्स सामान्य दिनों की तरह ही बनते रहने चाहिए।

1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों पर सीधा असर

भारत में वेतन आयोग का इतिहास बहुत पुराना है। देश का पहला वेतन आयोग जनवरी 1946 में स्थापित किया गया था, और तब से लेकर अब तक हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित करने की परंपरा रही है। अब तक भारत सात वेतन आयोगों की सिफारिशें देख चुका है।

यह 8th Pay Commission इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी सिफारिशों का सीधा असर 1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों पर पड़ेगा, जिसमें सेवारत केंद्रीय सरकारी कर्मचारी, सेना के जवान, पेंशनभोगी (Pensioners) और उनके परिवार शामिल हैं। यदि अटेंडेंस और लीव के नियमों में यह बदलाव होता है, तो लाखों कर्मचारियों का कामकाजी जीवन तनावमुक्त और आसान हो जाएगा।

मेमोरेंडम की समय सीमा समाप्त: अब अगले चरण में क्या होगा?

आठवें वेतन आयोग के लिए ऑनलाइन प्रस्ताव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम समय सीमा (15 जून) समाप्त हो चुकी है। आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि इसके बाद कोई तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी और न ही हार्ड कॉपी या ईमेल के जरिए भेजे गए प्रस्तावों को स्वीकार किया जाएगा।

अब पूरी प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका है, और ध्यान इस बात पर शिफ्ट हो गया है कि कर्मचारी संगठनों की किन मांगों को आयोग स्वीकार करता है, किसे संशोधित करता है या किसे खारिज करता है। अटेंडेंस के अलावा आयोग के पास कई अन्य बड़ी और गंभीर मांगें आई हैं:

1. न्यूनतम मूल वेतन (Minimum Basic Pay) में बड़ा बदलाव

यह इस वेतन आयोग की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक है। All India NPS Employees Federation (AINPSEF) और अन्य संगठनों ने तर्क दिया है कि न्यूनतम वेतन तय करने का पुराना फॉर्मूला आज की वित्तीय वास्तविकताओं से मेल नहीं खाता।

  • पुराना फॉर्मूला बनाम आधुनिक जरूरतें: पहले के वेतन आयोग भोजन की कैलोरी (3,490 कैलोरी प्रति मानक परिवार), कपड़े और आवास के पुराने खर्चों पर न्यूनतम वेतन तय करते थे।
  • 5-फैमिली-यूनिट की मांग: यूनियनों का कहना है कि आज एक सरकारी कर्मचारी को बच्चों की उच्च शिक्षा, महंगे स्वास्थ्य इलाज, डिजिटल कनेक्टिविटी, परिवहन और वृद्ध माता-पिता की देखभाल पर भारी खर्च करना पड़ता है। इसलिए, वर्तमान 3-फैमिली-unit फॉर्मूले को बदलकर 5-फैमिली-unit फॉर्मूला लागू किया जाना चाहिए ताकि न्यूनतम बेसिक सैलरी को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जा सके।

 

2. हायर फिटमेंट फैक्टर (Higher Fitment Factor) की मांग

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) होता है जिसका उपयोग नए वेतन आयोग के तहत मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करने के लिए किया जाता है।

  • जहां 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर दिया गया था, वहीं कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की लागत को देखते हुए इसे बढ़ाकर 3.83 किया जाना चाहिए।
  • वहीं, Indian Railway Technical Supervisors’ Association (IRTSA) ने एक अलग और अनोखा सुझाव दिया है। उनका कहना है कि सभी स्तरों के कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर रखने से विसंगतियां (Pay Compression) पैदा होती हैं, इसलिए अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों के लिए अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर तय होने चाहिए।

3. Dearness Allowance (DA) का बेसिक पे में विलय

वर्तमान समय में महंगाई भत्ता (DA) बढ़ते-बढ़ते 60% के स्तर तक पहुंच चुका है। NC-JCM ने अपने ज्ञापन में पुरजोर मांग की है कि नया पे-स्ट्रक्चर या पे-मैट्रिक्स लागू करने से पहले इस संचित महंगाई भत्ते (Accumulated DA) को कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में पूरी तरह से मर्ज (Merge) कर दिया जाना चाहिए, ताकि महंगाई के कारण घटी उनकी वास्तविक क्रय शक्ति (Purchasing Power) को बहाल किया जा सके।

4. पेंशन सुधार: OPS, NPS और UPS की बहस

आठवें वेतन आयोग के सामने पेंशन का मुद्दा भी बेहद गर्माया हुआ है। AINPSEF लगातार पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग कर रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बाजार के जोखिमों पर आधारित है और कर्मचारियों को बुढ़ापे की वित्तीय सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। इसके अलावा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और पेंशन सुरक्षा के अन्य मजबूत उपायों पर भी आयोग के सामने तीखी बहस और मांगें चल रही हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

8वें वेतन आयोग के गठन और प्रस्तावों की प्राप्ति के बाद अब परामर्श (Consultation) का दौर शुरू हो चुका है। आयोग की टीम देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में केंद्रीय संस्थानों, कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी एसोसिएशनों के साथ बैठकें कर रही है ताकि उनके दृष्टिकोण को सीधे समझा जा सके।

जहाँ तक 8th Pay Commission Attendance Rules की बात है, तो बायोमेट्रिक प्रणाली और ट्रैफिक जाम के इस दौर में 120 मिनट की मासिक छूट का प्रस्ताव बेहद व्यावहारिक और कर्मचारी-हितैषी प्रतीत होता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले महीनों में वेतन आयोग जब अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपेगा, तो इनमें से कितनी मांगों पर अंतिम मुहर लगती है।

आपकी क्या राय है?

क्या आपको लगता है कि महीने में केवल दो बार लेट होने की जगह 120 मिनट की कुल ग्रेस पीरियड मिलना ज्यादा बेहतर विकल्प है? और न्यूनतम वेतन को लेकर आपकी क्या उम्मीदें हैं? अपनी राय हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं!

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